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Edible Oil Price: खाने के तेल को सस्ता करने के लिए मोदी सरकार ने घटाया ये शुल्क, जानिए कितनी कम हो जाएगी कीमत
अब तक छह राज्यों, आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने अग्रिम रूप से लिया है और कुल 164.15 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्से के रूप में जारी किए गए हैं। इन राज्यों के पास आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने के लिए धन और जनादेश है। इसमें कहा गया है, ‘‘अन्य राज्यों से भी अनुरोध किया गया है कि वे आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर हस्तक्षेप के लिए पीएसएफ का गठन करें।’’

Coforge Limited (COFO)

कोफ़्फ़र शेयर (COFO शेयर) (ISIN: INE591G01017) के बारे में। आप इस पृष्ठ के अनुभागों में से किसी एक में जा कर ऐतिहासिक डेटा, चार्ट्स, तकनीकी विश्लेषण तथा अन्य के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड समाचार

Investing.com - कोफ़्फ़र ने गुरुवार को दूसरी तिमाही के नतीजों में विश्लेषकों के अनुमानों को पिछाडा और आय ने से कम करा. कंपनी ने आय प्रति स्टॉक ₹32.38 बताया कुल आय ₹19.59 पर.

मालविका गुरुंग द्वारा Investing.com -- घरेलू बाजार ने चार दिन की तेजी की लकीर को तोड़ दिया और गुरुवार को नकारात्मक रूप में खुला, कमजोर वैश्विक संकेतों को ट्रैक करते हुए, अमेरिकी.

मालविका गुरुंग द्वारा Investing.com -- भारतीय आईटी दिग्गज इंफोसिस (NS:INFY) के शेयर गुरुवार को 52-सप्ताह के निचले स्तर 1,360 रुपये पर आ गए हैं और आखिरी बार 0.2% की गिरावट के साथ.

एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड विश्लेषण

भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (NS:TCS), जिसका बाजार पूंजीकरण INR 11,76,860 करोड़ है, FY23 की पहली तिमाही के आय सत्र की शुरुआत 8 जुलाई 2022 को करेगी।.

आईटी स्टॉक दिन के लिए स्टार परफॉर्मर हैं। अधिकांश आईटी शेयर अपनी विशाल इंट्रा डे रैलियों के साथ व्यापक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। सुबह के कारोबार में जहां निफ्टी 50.

वैश्विक अनुसंधान और ब्रोकरेज फर्म, नोमुरा भारतीय आईटी क्षेत्र पर मंदी की स्थिति में आ गई है। फर्म ने कई फ्रंटलाइन भारतीय आईटी कंपनियों को डाउनग्रेड किया है और लक्षित कीमतों में.

एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड कंपनी प्रोफाइल

एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड कंपनी प्रोफाइल

  • प्रकार : इक्विटी
  • बाज़ार : भारत
  • आईसआईन : INE591G01017
  • एस/न : COFORGE

Coforge Limited provides information technology (IT) and IT enabled services in India, the Americas, Europe, the Middle East and Africa, and the Asia Pacific. It offers digital process automation services, including workflow/process management, artificial intelligence (AI) and predictive analytics, robotic process automation, and case management; digital services, such as digital integration, Salesforce, MuleSoft, digital interactive and advisory, automation, digital innovation, and innovation as a services; and cloud and infrastructure management services comprising cloud, workplace, cybersecurity, data center, and always on network, as well as service integration services. The company also provides cybersecurity services, which include security incident management platform, managed automated security testing and enhanced remediation, intelligent detection and response of threats, access control and entity management, governance risk management and compliance, and secure adaptive fortified endpoints, as well as phishing, analysis, and training and testing platform. In addition, it offers AI and cognitive, business analytics, and data engineering services; advanced application engineering services, including development, operations, and quality engineering शेयर की कीमतों को लक्षित करें services; business process solutions; and media solutions, such as print design services and marketing solutions. The company serves insurance, travel, transportation, hospitality, banking and financial services, healthcare and life sciences, public sector, hi-tech and manufacturing, media and entertainment, and retail and consumer goods industries. Coforge Limited has strategic alliances with Kong Inc. for cloud API services; and Newgen Software Technologies Limited to enhance digital operations शेयर की कीमतों को लक्षित करें for organizations. The company was formerly known as NIIT Technologies Limited and changed its name to Coforge Limited in August 2020. Coforge Limited was incorporated in 1992 and is based in New Delhi, India.

शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 59000 और 17600 के पार खुला निफ्टी

Share Market Live Updates: अबीएसई का 30 स्टॉक्स वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 275 अंकों की बढ़त के साथ 59050 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी की शुरुआत भी हरे निशान के साथ हुई।

शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 59000 और 17600 के पार खुला निफ्टी

Share Market Opening Bell: अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को बढ़त के साथ बंद हुए। इसका असर आज घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार की शुरुआत आज मजबूती के साथ हुई है। सप्ताह के अंतिम कारेाबारी दिन यानी शुक्रवार को बीएसई का 30 स्टॉक्स वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 275 अंकों की बढ़त के साथ 59050 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी की शुरुआत भी हरे निशान के साथ हुई।

बता दें अमेरिकी शेयर बाजार का प्रमुख संवेदी सूचकांक डाऊ जोंस 322 अंकों की उछाल के साथ 33291 के स्तर पर बंद हुआ तो नैस्डैक 207 अंक या 1.67 फीसद उछलकर 12639 के स्तर पर कारोबार समाप्त करने में कामयाब रहा। जबकि, एसएंडपी 4,199.12 के स्तर पर बंद हुआ। इसमें कुल बढ़त रही 58.35 अंकों की।

टाइटन की अगले दो साल में खाड़ी क्षेत्र, उत्तरी अमेरिका में 20-30 तनिष्क स्टोर खोलने की योजना

टाटा समूह की कंपनी टाइटन की अगले दो-तीन साल में खाड़ी और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में अपने आभूषण ब्रांड तनिष्क के लगभग 20-30 स्टोर खोलने की योजना है। कंपनी के प्रबंध निदेशक सी के वेंकटरमण ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अमेरिका में अपना पहला तनिष्क स्टोर खोलेगी

कंपनी इस क्षेत्र में व्यापक रूप से फैले प्रवासियों को लक्षित कर रही है। कंपनी अमेरिका में सितंबर में अपना पहला तनिष्क स्टोर खोलेगी। कंपनी उत्तरी अमेरिकी बाजार और पश्चिमी एशिया क्षेत्र में अधिक स्टोर की योजना में है। वेंकटरमण ने कहा कि शेयर की कीमतों को लक्षित करें घरेलू बाजार के लिए टाइटन आने वाले त्योहारी सीजन को लेकर 'सकारात्मक' है। कंपनी को इस वर्ष 15 से 20 प्रतिशत की एकीकृत बिक्री वृद्धि की उम्मीद है।
गुरुवार का हाल: आखिरी आधे घंटे में हुई बिकवाली से बाजार टूटे

शेयर बाजारों में कारोबार के अंतिम आधे घंटे में तेज बिकवाली से शुरुआती बढ़त जाती रही और बीएसई सेंसेक्स 311 अंक की गिरावट के साथ शेयर की कीमतों को लक्षित करें बंद हुआ। वायदा एवं विकल्प खंड में मासिक सौदों के निपटान के अंतिम दिन आईटी और बैंक शेयरों में बिकवाली से बाजार नुकसान में रहा।

सेंसेक्स कारोबार के दौरान लाभ में रहा लेकिन अंतिम आधे घंटे में तेज बिकवाली से यह 310.71 अंक की गिरावट के साथ 58,774.72 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह ऊंचे में 59,484.35 अंक तक गया और नीचे में 58,666.41 अंक तक आया। निफ्टी 82.50 अंक टूटकर 17,522.45 अंक पर बंद हुआ।

बाजार के मौजूदा हालात में निवेश को लेकर लग रहा है डर, ऐसे बनाएं मजबूत पोर्टफोलियो

Investment Strategy: इक्विटी बाजार लंबी अवधि के लिए आपकी दौलत में इजाफा करते हैं, लेकिन वे इनमें इस दौरान टर्म में उतार चढ़ाव भी रहता है. इक्विटी निवेश के जरिए पाउंडिंग का फायदा पाने के लिए आपको लंबी अवधि तक अपने निवेश को बनाए रखना होगा.

Investment Strategy: शेयर बाजार (Stock Market) में कभी तेजी आ रही है तो कभी गिरावट. साल 2022 में अबतक भले ही बाजार पॉजिटिव हैं, लेकिन अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. इसके पीछे कई तरह के ग्लोबल फैक्‍टर ज्यादा जिम्मेदार हैं. जैसे महंगाई, रेट हाइक, मंदी की आशंका और जियो-पॉलिटिकल टेंशन. फिलहाल इस बीच निवेशक अपने निवेश को लेकर या तो कनफ्यूज हो रहे हैं या डरे हुए हैं. आखिर मौजूदा हालात में उन्हें कहां निवेश करना चाहिए?

बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड के CEO सुरेश सोनी ने कहा, अभी हम दुनिया भर के बाजारों में में बहुत ज्यादा अस्थिरता देख रहे हैं. डेवलप्ड इकोनॉमिज में पिछले चार दशक में महंगाई का उच्चतम स्तर दिख रहा है. जिसकी वजह से केंद्रीय बैंक एग्रेसिव तरीके से ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी करने को मजबूर हो रहे हैं. जिसके चलते मंदी की आशंका बढ़ रही है और साथ ही कैपिटल मार्केट में अस्थिरता का कारण बन रहा है. अमेरिकी डॉलर इंटरेस्ट रेट में तेज बढ़ोतरी से मुद्राओं और उभरते बाजारों पर दबाव पड़ा है.

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हालांकि इस दौरान भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है. भारत में महंगाई दर उच्च है, लेकिन यह मैनेजबल रही है और अर्थव्यवस्था ने भी लचीलापन दिखाया है. बड़े घरेलू आधार को देखते हुए हमारा मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था प्रत्याशित ग्लोबल मंदी से अपेक्षाकृत कम प्रभावित रह सकती है. विदेशी पूंजी प्रवाह ग्लोबल फैक्‍टर्स के चलते अस्थिर रह सकता है, क्योंकि यह ग्लोबल सेंटीमेंट से जुड़ा है. गनीमत है कि इक्विटी बाजार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है, बल्कि बढ़ी है.

पैसिव स्‍पेस में कर सकते हैं एंट्री

पैसिव फंड्स इंडस्‍ट्री ने हाल के वर्षों में निवेशकों की भागीदारी में बढ़ोतरी देखी है और यह इंडस्‍ट्री एक्टिव फंडों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि अभी इसका बेस कम है. पैसिव फंड में बढ़ोतरी काफी हद तक EPFO/अन्य PF ट्रस्टों के साथ-साथ एचएनआई (NHAI) और अन्य संस्थागत निवेशकों द्वारा कुछ हद तक संचालित हुई है. वर्तमान में पैसिव फंड कुल शेयर की कीमतों को लक्षित करें इंडस्‍ट्री एसेट का 15% हिस्सा है और हम आने वाले वर्षों में उनके मार्केट शेयर में और बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं.

हमारा मानना है कि पैसिव फंडों की डिमांड मजबूत बनी रहेगी और उम्मीद है कि इंडस्‍ट्री AUM में प्रमुख हिस्सेदारी बनाए रखेंगे. हमारा मानना है कि एक्टिव मैनेजर्स ने भारत में अल्फा बनाया है और अच्छी तरह से मैनेज होने वाले एक्टिव फंड बेहतर प्रदर्शन जारी रख सकते हैं. फिलहाल पैसिव स्‍पेस में इंटरेस्ट बढ़ रहा है, लेकिन हम अपने एक्टिव फंड बिजनेस में भी मजबूत बढ़ोतरी देख रहे हैं. हम स्पष्ट रूप से टारगेटेड ऑफरिंग यानी लक्षित पेशकशों के साथ पैसिव स्‍पेस में एंट्री करने पर भी विचार कर सकते हैं.

Mutual Fund में बढ़ा निवेश

भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों में महत्वपूर्ण ग्रोथ देखने को मिली है. बाजार के विकास और रेगुलेशन के साथ साथ इंडस्‍ट्री में भी साल दर साल ग्रोथ देखने को मिली है. पिछले कुछ वर्षों में म्‍यूचुअल फंड इंडस्ट्री निवेशकों के बीच अच्छा खासा पॉपुलर हुआ है और निवेश लगातार बढ़ रहा है. रिटेल निवेशक अब संस्थागत निवेशकों यानी इंस्टीट्यूशनल इन्‍वेस्‍टर्स की तुलना में AuM के बड़े हिस्से का योगदान करते हैं. बचत का वित्तीयकरण म्‍यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित हुआ है.

हमारा मानना है कि भारतीय निवेशक अब मैच्‍योर हो रहे हैं और बाजार के बारे में उनकी समझ में काफी सुधार हुआ है. यह इस फैक्‍ट से भी साबित होता है कि पिछले 12 महीनों में म्यूचुअल फंड अन्य डीआईआई के साथ बाजारों में नेट इन्‍वेस्‍टर रहे हैं, जबकि FPIs ने भारी मात्रा में पैसा निकाला है.

मंथली बेसिस पर SIP AuM और अकाउंट में बढ़ोतरी इंडस्‍ट्री के लिए एक बड़ा और सपोर्ट देने वाला फैक्‍टर रहा है. यह आम तौर पर लंबी अवधि का निवेश है और 2022 जैसी निगेटिव बाजार स्थितियों में भी लचीला साबित हुआ है.

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किस तरह के फंड में करें निवेश?

सुरेश सोनी ने कहा, Mutual Fund में निवेश किसी भी निवेशक के वित्तीय लक्ष्यों, उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक इन्‍वेस्‍टमेंट हॉरिजॉन के साथ-साथ निवेशक की रिस्‍क लेने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए. अधिक जोखिम लेने की क्षमता वाले और/या लंबी अवधि के लक्ष्य वाले निवेशक एसेट के अधिक रेश्‍यो को इक्विटी जैसे एसेट क्लास में निवेश करने का विकल्प चुन सकते हैं, जहां रिस्‍क ज्‍यादा है.

म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों को SIP के जरिए या हाइब्रिड फंड (Hybrid Fund) जैसे बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (Balanced Advantage Fund) या लार्ज कैप डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड (Large cap Diversified Equity Fund) में निवेश करने पर विचार करना चाहिए. हालांकि निवेश के पहले अपने स्तर पर एडवाइजर से सलाह लें ताकि उनका पोर्टफोलियो बेहतर बन सके.

Small Cap Fund में कितने साल के लिए निवेश करना चाहिए?

एक कैटेगरी के रूप में स्मॉल कैप फंड (Small Cap Fund) अधिक वोलेटाइल या अस्थिर होते हैं और कभी-कभी इनमें तेज गिरावट देखी जा सकती है. हालांकि, समय के साथ उनके पास लार्ज कैप की तुलना में अधिक रिटर्न देने की क्षमता होती है, क्योंकि इन कंपनियों की ग्रोथ रेट अधिक हो सकती है. उनमें से कुछ को रीसेट किया जा सकता है.

हमारा मानना है कि स्मॉल कैप फंडों में निवेश लंबी अवधि के लिए होना चाहिए, मसलन 5 साल से अधिक. ध्यान रखें कि अन्य डायवर्सिफाइड इक्विटी फंडों की तुलना में प्रदर्शन महत्वपूर्ण अवधि के लिए अलग-अलग हो सकता है.

निवेश मंत्र

बाजार की अस्थिरता का उपयोग करें. बाजार में जब गिरावट होती है तो आपको आकर्षक वैल्यूएशन पर शेयर मिलते हैं. गिरावट के दौर में बाजार भले ही नीचे आ जाएं, लेकिन वे हमेशा के लिए नीचे नहीं रहते. एक लंबी अवधि के निवेशक के लिए, ये इक्विटी में पैसे लगाने और लंबी अवधि के पैसा बनाने के अवसर की तरह होता है. अपना एसेट एलोकेशन तय करें और निवेश में बने रहें. रोज रोज कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर ध्यान न दें.

नए निवेशकों के लिए सलाह

इक्विटी बाजार लंबी अवधि के लिए आपकी दौलत में इजाफा करते हैं, लेकिन वे इनमें इस दौरान टर्म में उतार चढ़ाव भी रहता है. इक्विटी निवेश के जरिए पाउंडिंग का फायदा पाने के लिए आपको लंबी अवधि तक अपने निवेश को बनाए रखना होगा.

पहला- अपना एसेट एलोकेशन सही करें. अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के लक्ष्य को देखकर इक्विटी में निवेश करें. इक्विटी निवेश को कम से कम 3-5 साल के लक्ष्‍य के साथ शुरू करें. छोटी अवधि के लिए, आप बैंक डिपॉजिट और डेट फंड पर विचार कर सकते हैं.

दूसरा- सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STPs) का इस्तेमाल करें. इक्विटी फंडों में निवेश करने के लिए ये बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं.

इन सेक्टर्स को लेकर पॉजिटिव

उन्होंने कहा, भारत की अर्थव्यवस्था अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मजबूत बनी रहेगी, मुख्य रूप से घरेलू खपत और खर्च के कारण. इसलिए, हम डोमेस्टिक ओरिएंटेड सेक्‍टर्स जैसे फाइनेंशियल, कंज्‍यूमर, इंडस्ट्रियल और हेल्‍थकेयर पर ओवरवेट हैं. कमोडिटी की कीमतों में नरमी से भारत को शेयर की कीमतों को लक्षित करें फायदा हो सकता है. हम कैपेक्स साइकिल के रिवाइवल के शुरुआती संकेत भी देख रहे हैं. अंत में, प्रीमियमकरण की लंबी अवधि की कहानी, अंडर पेनिट्रेशन और फेवरेबल जियोग्राफिक्‍स भारत की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ा रही है.

कीमत बढ़ोतरी पर लगाम लगाने को सरकार ने राज्यों को प्याज का बफर स्टॉक जारी किया

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) केंद्र ने खुदरा प्याज की कीमतों में किसी भी तेजी पर लगाम लगाने को लेकर कदम उठाया है। उसने उन राज्यों के लिये प्याज का बफर स्टॉक सुनियोजित और लक्षित तरीके से उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जहां दाम पिछले महीनों के मुकाबले बढ़ रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि बाजारों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में प्याज की लासलगांव और पिंपलगांव थोक मंडियों में भी बफर स्टॉक जारी किया जा रहा है।

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इस साल 17 फरवरी तक, प्याज की अखिल भारतीय औसत कीमत पिछले साल की तुलना में 22.36 प्रतिशत कम थी। शेयर की कीमतों को लक्षित करें मंत्रालय के अनुसार, मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के माध्यम से प्रभावी बाजार हस्तक्षेप के कारण वर्ष 2021-22 के दौरान प्याज की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। इसी तरह, आलू का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य पिछले महीने की तुलना में 17 फरवरी को 6.96 प्रतिशत कम यानी 20.58 रुपये प्रति किलोग्राम था।

Edible Oil Price: खाने के तेल को सस्ता करने के लिए मोदी सरकार ने घटाया ये शुल्क, जानिए कितनी कम हो जाएगी कीमत
अब तक छह राज्यों, आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने अग्रिम रूप से लिया है और कुल 164.15 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्से के रूप में जारी किए गए हैं। इन राज्यों के पास आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने के लिए धन और जनादेश है। इसमें कहा गया है, ‘‘अन्य राज्यों से भी अनुरोध किया गया है कि वे आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर हस्तक्षेप के लिए पीएसएफ का गठन करें।’’

पिछले 1 महीने में सस्ता हुआ है टमाटर
टमाटर के मामले में, पिछले एक महीने के दौरान कीमतों में गिरावट आई है, हालांकि यह पिछले साल के स्तर से थोड़ा ऊपर रहा है। एक फरवरी तक टमाटर की अखिल भारतीय औसत कीमत 26.69 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो पिछले महीने की तुलना में कम है। जैसे-जैसे उत्तर भारत में आवक में तेजी आएगी, आने वाले सप्ताह में कीमतों में और गिरावट आएगी। दक्षिण भारत में आवक भी आने वाले सप्ताह में बढ़ेगा और फरवरी के अंत तक गति पकड़ लेगा।

शीर्षक जोखिम

शेयरों के मूल्य को प्रभावित करने के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं। हेडलाइन रिस्क एक ऐसा हैफ़ैक्टर जो एक सुरक्षा की कीमतों पर एक मजबूत प्रभाव डाल सकता है। यह उस घटना को संदर्भित करता है जो स्टॉक पर एक बड़ा जोखिम लगाता हैमंडी और समाचारों की सुर्खियों के कारण कुछ विशिष्ट प्रतिभूतियाँ।

Headline Risk

मीडिया द्वारा चित्रित कहानी निवेश उद्योग के एक विशिष्ट क्षेत्र या पूरे शेयर बाजार को प्रभावित कर सकती है। हेडलाइन रिस्क अर्थ का सबसे अच्छा उदाहरण चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संभावित युद्ध की 2018-19 की सुर्खियां हैं।

उदाहरण

एक और उदाहरण लेते हैं-

मान लीजिए कि कोई शेयर की कीमतों को लक्षित करें मेडिकल कंपनी एक नई दवा लॉन्च करती है और दावा करती है कि यह मरीज के कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काफी कम कर सकती है। प्रतियोगी गहन शोध करता है और पाता है कि दवा का रोगी के कोलेस्ट्रॉल पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव होते हैं जो यकृत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि वे अपने अध्ययन से संबंधित वैज्ञानिक प्रमाण प्राप्त करने में असमर्थ हैं, वे इस खबर को मीडिया में जारी करते हैं। यह एक शीर्षक बनाता है।

जिस कंपनी ने कोलेस्ट्रॉल के लिए दवा लॉन्च की है, उसे इन अफवाहों और खबरों शेयर की कीमतों को लक्षित करें शेयर की कीमतों को लक्षित करें पर नियंत्रण रखना चाहिए या एक अच्छा मौका है कि कंपनी स्टॉक मूल्य में भारी गिरावट का अनुभव करेगी। भले ही प्रतियोगी वैज्ञानिक प्रमाण के साथ नहीं आ सके, लोग मीडिया पर विश्वास करते हैं।

क्या हेडलाइन शेयर बाजार को प्रभावित करती है?

सोशल मीडिया साइट्स, टेलीविज़न, समाचार पत्रों आदि पर आपको जो सुर्खियाँ पढ़ने को मिलती हैं, उनका शेयर बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। शीर्षक स्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि खबर सच है या गलत। पत्रकार भले ही भ्रामक खबरें प्रकाशित करें, निवेशक इस पर विश्वास करेंगे। नतीजतन, शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट आएगी। हेडलाइन जोखिम तब होता है जब समाचार शीर्षक के कारण स्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है।

सुर्खियों का शेयर बाजार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विशिष्ट दवा को एफडीए की मंजूरी मिल जाती है और समाचार सोशल मीडिया और टेलीविजन पर प्रकाशित हो जाता है, तो दवा के स्टॉक की कीमतेंउत्पादन कंपनी बढ़ेगी। इसका मतलब है कि अगर मीडिया ब्रांड के बारे में कुछ सकारात्मक खबरों का उल्लेख करता है तो स्टॉक की कीमतों में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

शीर्षक जोखिम को कैसे नियंत्रित करें?

हेडलाइन जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए, कंपनियों को जनसंपर्क अभियान को बढ़ाना चाहिए। ब्रांडों को एक मजबूत जनसंपर्क अभियान बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है ताकि वे लक्षित दर्शकों और निवेशकों के लिए व्यवसाय की सकारात्मक छवि पेश कर सकें। यह न केवल नकारात्मक कहानियों की भरपाई करेगा, बल्कि एक प्रभावी प्रेस विज्ञप्ति अभियान आपको शीर्षक जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

निवेशकों के लिए, शेयर बाजार पर रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करने के लिए केवल विश्वसनीय और प्रतिष्ठित समाचार स्रोतों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें एक सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। सभी समाचार चैनल और अन्य स्रोत विश्वसनीय और सटीक कहानी पेश नहीं करते हैं। इसलिए, कुछ यादृच्छिक मीडिया कहानियों के आधार पर निर्णय न लें।

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