विदेशी मुद्रा व्यापार प्रणाली

दिन व्यापार नियम

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Image Source : TWITTER शनिदेव

शनिवार के दिन इन चीजों का घर में प्रवेश करें वर्जित और फिर देखें चमत्कार

खरीददारी करना सभी को पसंद होता है। जब भी आपको वक्त मिलता है तो आपके शापिंग के लिए निकल जाते है। हमें ज्यादातर समय शनिवार या रविवार को मिलता है, लेकिन शनिवार को शापिंग करते वक्त सावधानियां बरतनी चाहिए।

Written by: India TV Lifestyle Desk
Published on: March 26, 2022 11:55 IST

शनिदेव- India TV Hindi

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खरीददारी करना सभी को पसंद होता है। जब भी आपको वक्त मिलता है तो आपके शापिंग के लिए निकल जाते है। हमें ज्यादातर समय शनिवार या रविवार को मिलता है, लेकिन शनिवार को शापिंग करते वक्त सावधानियां बरतनी चाहिए, क्योंकि इस दिन कुछ चीजें खरीदने से घर में कलह, दुख, लड़ाई जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। इस बारें में ज्योतिष शास्त्र में भी इसके कुछ नियम बताए गए हैं। जानिए ऐसी कौनसी वस्तुएं हैं जो शनिवार को घर नहीं लानी चाहिए या इस दिन इन्हें नहीं खरीदना चाहिए-

काले तिल बनते हैं बाधा-

सर्दियों में काले तिल शरीर को पुष्ट करते हैं। ये शीत से मुकाबला करने के लिए शरीर की गर्मी को बरकरार रखते हैं। पूजन में भी इनका उपयोग किया जाता है। शनि देव की दशा टालने के लिए काले तिल का दान और पीपल के वृक्ष पर भी काले तिल चढ़ाने का नियम है, लेकिन शनिवार को काले तिल कभी न खरीदें। कहा जाता है कि इस दिन काले तिल खरीदने से कार्यों में बाधा आती है।

अनाज पीसने की चक्की-

शनिवार के दिन अनाज पीसने के लिए चक्की भी नहीं खरीदनी चाहिए। माना जाता है कि यह परिवार में तनाव लाती है और इसके आटे से बना भोजन रोगकारी होता है।

लोहे का सामान-
समाज में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है कि शनिवार को लोहे का बना सामान नहीं खरीदना चाहिए। मान्यता है कि शनिवार को लोहे का सामान क्रय करने से शनि देव कुपित होते हैं और शनि दोष भी लग सकता है, लेकिन इस दिन लोहे से बनी चीजों के दान का विशेष महत्व है। लोहे का सामान दान करने से शनि देव की कोप दृष्टि निर्मल होती है और घाटे में चल रहा व्यापार मुनाफा देने लगता है। इसके अतिरिक्त शनि देव यंत्रों से होने वाली दुर्घटना से भी बचाते हैं।

नमक खरीदने से हो सकता है कर्ज-
नमक हमारे भोजन का सबसे अहम हिस्सा है। अगर नमक खरीदना है तो बेहतर होगा शनिवार के बजाय किसी और दिन ही खरीदें। शनिवार को नमक खरीदने से यह उस घर पर कर्ज लाता है। साथ ही रोगकारी भी होता है।

तेल न खरीदें-
शनिवार के दिन तेल खरीदने से भी बचना चाहिए। हलांकि तेल का दान किया जा सकता है। काले श्वान को सरसों के तेल से बना हलुआ खिलाने से शनि की दशा टलती है। ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को सरसों या किसी भी पदार्थ का तेल खरीदने से वह रोगकारी होता है।

ईंधन खरीदना परिवार के लिए कष्टकारक-
भारतीय संस्कृति में अग्नि को देवता माना गया है और ईंधन की पवित्रता पर विशेष जोर दिया गया है लेकिन शनिवार को ईंधन खरीदना वर्जित है। माना जाता है कि शनिवार को घर लाया गया ईंधन परिवार को कष्ट पहुंचाता है।

कैंची लाती है रिश्तों में तनाव-
कैंची ऐसी चीज है जो कपड़े, कागज आदि काटने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है। पुराने समय से ही कपड़े के कारोबारी, टेलर आदि शनिवार को नई कैंची नहीं दिन व्यापार नियम खरीदते। यह मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कैंची रिश्तों में तनाव लाती है।

स्याही दिलाती है अपयश-
विद्या मनुष्य को यश और प्रसिद्धि दिलाती है और उसे अभिव्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है कलम। कागज, कलम आदि खरीदने के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन गुरुवार है। शनिवार को स्याही न खरीदें। यह मनुष्य को अपयश का भागी बनाती है।

काले जूते लाते हैं असफलता-
शरीर के लिए जितने जरूरी वस्त्र हैं, उतने ही जूते भी। खासतौर से काले रंग के जूते पसंद करने वालों की तादाद आज भी काफी है। अगर आपको काले रंग के जूते खरीदने हैं तो शनिवार को न खरीदें। माना जाता है कि शनिवार को काले जूते खरीद कर पहनने से काम में असफलता प्राप्त होती है।

झाडू न खरीदें
झाडू घर के विकारों को बुहार कर उसे निर्मल बनाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। झाडू खरीदने के लिए शनिवार को उपयुक्त नहीं माना जाता। शनिवार को झाडू घर लाने से दरिद्रता का आगमन होता है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इनकी पुष्टि नहीं करता है।

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नौकरी और व्यापार में तरक्की के रास्ते खोलता है टाइगर रत्न, जानें फायदे और धारण करने के नियम

रत्नों का हमारे जीवन पर खासा प्रभाव पड़ता है. Image-Shutterstock

मनुष्य के जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है. यह सब उसकी कुंडली में मौजूद ग्रहों की दशा की वजह से दिन व्यापार नियम होता है. यदि कोई व्यक्ति . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : August 01, 2022, 02:20 IST

हाइलाइट्स

रत्न धारण करके इन परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
टाइगर रत्न करियर में बहुत जल्दी और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है.

Gemstones: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह कमजोर है, जिसकी वजह से उसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो ऐसे व्यक्ति को रत्नों के जानकार उसकी राशि और कुंडली के अनुसार रत्न धारण करने की सलाह देते हैं. मान्यता है कि रत्न धारण करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही समस्याएं कम होती हैं. साथ ही बुरे ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव से राहत मिलती है.

ज्योतिष और पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा आज की इस कड़ी में बता रहे हैं कि ऐसा कौन सा रत्न दिन व्यापार नियम धारण करना चाहिए, जिससे व्यक्ति को नौकरी और व्यापार में आ रही परेशानियों से निजात मिल पाए.

कौन सा रत्न धारण करें

नौकरी और व्यवसाय में आ रही दिक्कतों के लिए ज्योतिष के जानकार टाइगर रत्न धारण करने की सलाह देते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें की टाइगर बहुत प्रभावशाली रत्नों में से एक माना जाता है. बेशक इस रत्न को नौ रत्नों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन नौकरी और व्यापार को लेकर इस रत्न के परिणाम अद्भुत हैं.

कैसा होता है टाइगर रत्न

टाइगर रत्न पीले और काले रंग की धारियों वाला होता है. इसे व्यापार और करियर के लिए धारण करना शुभ माना गया है.

कब धारण करें टाइगर रत्न

यदि कोई जातक पीड़ित ग्रह के प्रभाव से कर्ज में डूबा है और लगातार नौकरी या व्यापार में नुकसान झेल रहा है तो उस व्यक्ति को टाइगर रत्न धारण करना चाहिए. टाइगर रत्न को किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को तर्जनी दिन व्यापार नियम या अनामिका उंगली में धारण करना शुभ माना जाता है.

टाइगर रत्न धारण करने के फायदे

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार टाइगर रत्न करियर में बहुत जल्दी और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है. इस रत्न की विशेषता है कि यह कारोबारियों को बहुत लाभ प्रदान करता है. इस रत्न को पहनते ही तुरंत प्रभाव से इसका असर देखने को मिलता है. मान्यता के अनुसार जिन जातकों को यह रत्न सूट कर जाता है उसका सोया हुआ भाग्य जाग जाता दिन व्यापार नियम है. टाइगर रत्न धारण करने से जातक मान सम्मान और तरक्की के नए मुकाम हासिल करता है.

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लाइसेंस हेतु नियम एवं शर्तें

  • लाइसेंस धारी उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम 1964 और तदैन बनायी गई नियमावली और लाइसेंस जारी करने वाली मण्डी समिति की उपविधियों के उपबन्धों का पालन करेगा।
  • लाइसेंस धारी अधिनियम नियमावली तथा मण्डी समिति की उपविधियों के किन्हीं भी उपबन्धों के उपवचन अथवा् उल्लंघन की अनुज्ञा न देना और को भी उपवचन या उल्लंघन जो उसकी जानकारी में आये उसकी लिखित सूचना मण्डी समिति को देगा।
  • लाइसेंस धारी अपने कारोबार का संचालन न्यायगत व्यवहार के सिद्धान्तों के आधार पर ईमानदारी और उचित रूप से करेगा
  • लाइसेंस धारी निर्दिष्ट कृषि उत्पादन के सम्बन्ध में ऐसे प्रपत्रों में ऐसे लेखे रखेगा और ऐसी विवरणियाँ प्रस्तुत करेगा जो समय-समय पर मण्डी समिति द्वारा निर्दिष्ट की जाय।
  • लाइसेंस धारी समस्त सौंदों को जैसे ही वह हो जायें अभिलेखों में दर्ज करेगा तथा स्टाफ की स्थिति के अनुसार अभिलेखों को अद्यावधि रखेगा।
  • लाइसेंस धारी लाइसेंस के अधीन किसी कारोबार के सौदों के लिए जिसमें कृषि उत्पादन के संग्रह अथवा् प्रक्रिया भी सम्मिलित है। लाइसेंस के लिए दिये गये प्रार्थना पत्र में उल्लिखित भू-गृहादि के अतिरिक्त जब कभी कोई भू-गृहादि बढ़ायेगा अथवा् उसमें परिवर्तन करेगा तो उसकी लिखित सूचना मण्डी समिति को देगा।
  • लाइसेंस धारी मण्डी समिति को पूर्व लिखित सूचना दिये बिना किसी भी व्यक्ति को जिसका नाम लाइसेंस के लिए दिये गये प्रार्थना पत्र में न हो अपने नियमित प्रदत्त रोजगार में नहीं लेगा।
  • लाइसेंस धारी सचिव तथा किसी भी अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी का जो मण्डी समिति द्वारा लाइसेंस धारी के लेखों और स्टाफ की जांच करने के लिए प्राधिकृत किया गया हो, समस्त उचित सुविधायें देने की व्यवस्था करेगा।
  • लाइसेंस धारी मांगने पर अपना लाइसेंस सभापति सचिव अथवा् मण्डी समिति द्वारा तदर्थ प्राधिकृत अन्य किसी व्यक्ति को प्रस्तुत करेगा।
  • लाइसेंस धारी ऐसी कार्यवाहियों अथवा् व्यवहारों में निरत न होगा जो निर्दिष्ट कृषि उत्पादन के विक्रय तथा क्रय विनियम के लिए हानिकर हो।
  • लाइसेंस धारी किसी लाइसेंस प्राप्त दलाल, तोलक, मापक या पल्लेदार को अपने नियमित प्रदत्त कर्मचारी के रूप में न तो रखेगा न बने रहने देगा।
  • लाइसेंस धारी अपनी दुकान पर विक्रय अथवा् संग्रह के लिए लाये गये निर्दिष्ट कृषि उत्पादन की सुरक्षित अभिरक्षा तथा उसके संरक्षण के लिए उत्तरदायी होगा।
  • लाइसेंस धारी प्रतियोगिता को हटाने के लिए क्रेताओं के साथ मिलकर कोई समुच्चय (चववस) अथवा् संयोजन नहीं बनायेगा तथा विक्रेता को उसके उत्पादन के उचित मूल्य से वंचित करने के लिए ऐसा करने का न कोई प्रयास करेगा और न उसके लिए उकसायेगा।
  • लाइसेंस धारी यदि वह व्यापारी है मण्डी स्थल में निर्दिष्ट कृषि उत्पादन के लिए किये गये नीलामों में उपस्थिति होने से न तो स्वयं जानबूझकर अलग रहेगा और न अपने प्राधिकृत किसी प्रतिनिधि को अलग रहने देगा।
  • लाइसेंस धारी अपने कारोबार के भू-गृहादि के किसी प्रमुख स्थान पर अपना लाइसेंस प्रदर्शित करेगा।
  • लाइसेंस धारी मण्डी स्थल में निर्दिष्ट कृषि उत्पादन की बिक्री तथा क्रय के सम्बन्ध में न तो स्वयं बहिष्कार करेगा और न किसी अन्य लाइसेंस धारी के बहिष्कार को प्रोत्साहित करेगा।
  • लाइसेंस धारी अधिनियम नियमावली तथा उपविधियों के अधीन दिन व्यापार नियम मण्डी समिति के सभापति या सचिव द्वारा समय-समय पर जारी किये गये आदेषों तथा निर्देषों का पालन करेगा।
  • लाइसेंस धारी से जब मण्डी समिति अथवा् उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा अपेक्षा की जाय तो अपने कारोबार से समयबद्ध विशयों पर ठीक-ठीक सूचना देगा।
  • लाइसेंस धारी यदि उसके पास मण्डी स्थल का लाइसेंस है निर्दिष्ट कृषि उत्पादन को केवल मण्डी स्थल में ही क्रय करेगा। मण्डी स्थल के बाहर मण्डी क्षेत्र में निर्दिष्ट कृषि उत्पादनों के विक्रय, क्रय, संग्रह, तौलने या प्रक्रिया हेतु किसी स्थान व्यवस्था करने के लिए पृथक लाइसेंस लेना आवष्यक होगा।
  • लाइसेंस धारी यदि वह फुटकर व्यापारी है किसी भी निर्दिष्ट कृषि उत्पादन को किसी एक समय में उपविधि की धारा 20 के अन्तर्गत से अधिक न तो क्रय करेगा न संग्रह करेगा।
  • लाइसेंस धारी यदि ग्राम व्यापारी है निर्दिष्ट कृषि उत्पादन को मण्डी क्षेत्र में कहीं भी सिवाय मण्डी स्थल के विक्रय नहीं करेगा।

उद्देश्य

  • मण्डी विनियमन का उद्देश्य व्यापार में असुविधा उत्पन्न करना नहीं बल्कि उससे उत्पादन कर्ता एवं व्यापारी तथा उपभोकता के हित में चलाना है।
  • विनियमित मण्डी में उत्पादन की शुद्धता एवं सफाई पर विषेश ध्यान दिया जाता है, जिससे वह आकर्षक बनकर अधिक मूल्य ही प्राप्त नहीं करती वरन् मण्डी को दूर-दूर तक प्रतिष्ठित भी करती है।
  • मण्डी में विक्रेता से आढ़त, धर्मादा, कर्दा, मण्डी शुल्क फालतू तौल या कोई अन्य कटौती लेना या आरोपित करना जुर्म है।

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